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तुने प्यार किया… मैंने इनकार किया…

तुने प्यार किया… मैंने इनकार किया।फर्क सिर्फ इतना था कि… तेरा दिल सफेद और मेरा दिल काला था। तुने सिकायत किया मैंने बगावत किया…. फर्क सिर्फ इतना था कि… तुने मुझमें खुशी देखी…मैंने तेरी ख़ुशी देखा। तू रोई मैंने मुड़के ना देखा… फर्क सिर्फ इतना था कि… तुझे मेरा हाथ चाहिए था… मुझे तेरी खुशियों […]

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Rahat Indori Shayari

गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है

गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या हैमैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है फक़ीर शाख़ कलन्दर इमाम क्या-क्या हैतुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है अमीर-ए-शहर के कुछ कारोबार याद आएमैँ रात सोच रहा था हराम क्या-क्या है

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Rahat Indori Shayari

‘हर इक तराशे हुए बुत को देवता न कहो’

हरेक चहरे को ज़ख़्मों का आइना न कहोये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो न जाने कौन सी मजबूरियों का क़ैदी होवो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो तमाम शहर ने नेज़ों पे क्यों उछाला मुझेये इत्तेफ़ाक़ था तुम इसको हादिसा न कहो ये और बात के दुशमन हुआ है आज […]