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Rahat Indori Shayari

jo aaj sahibe masnad hai…

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी हैये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द मेंयहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिनहमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त हैहमारे मुँह में तुम्हारी […]

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Rahat Indori Shayari

में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे, Mein tujhko kaise padhunga, mujhe kitaab to de

जुबा तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो देमें कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढावमें तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे Juba to khol, nazar to mila, jawaab to deMein kitni baar luta hun, mujhe to hisaab to de Tere badan ki likhawat mein hain […]

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Rahat Indori Shayari

गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है

गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या हैमैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है फक़ीर शाख़ कलन्दर इमाम क्या-क्या हैतुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है अमीर-ए-शहर के कुछ कारोबार याद आएमैँ रात सोच रहा था हराम क्या-क्या है

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Rahat Indori Shayari

‘हर इक तराशे हुए बुत को देवता न कहो’

हरेक चहरे को ज़ख़्मों का आइना न कहोये ज़िंदगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो न जाने कौन सी मजबूरियों का क़ैदी होवो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो तमाम शहर ने नेज़ों पे क्यों उछाला मुझेये इत्तेफ़ाक़ था तुम इसको हादिसा न कहो ये और बात के दुशमन हुआ है आज […]

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फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए…

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाएकाश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर कियाफिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए

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Rahat Indori Shayari

एक चिंगारी नज़र आई थी…

नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों सेख़्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूं हैं एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसेवो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के इन रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता हैनींदें कमरों में जागी हैं ख़्वाब छतों पर बिखरे हैं

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किसने दस्तक दी, दिल पे राहत इन्दोरी फेमस शायरी

किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन हैआप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला थामैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरनामैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था

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मैं पत्थरों की तरह गुँगे सामईन में था

मैं पत्थरों की तरह गुँगे सामईन में थामुझे सुनाते रहे लोग वाकिया मेरा खत मैनें भेजी जो मेरे पते से तेरे पते पर खत वापस कर दिया मुझको डाकिया मेरा इतनी शोहरत की तलब भी ना थी कभी मैं भीड़ से ही देखता रह गया झाँकिया मेरा खील उठी मैखाने की सजावट मेरे आने से […]

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Rahat Indori Shayari

ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ

अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ,ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ,फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया,ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।

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Rahat Indori Shayari

खुद को खुदा कहते थे

लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।