मैं पत्थरों की तरह गुँगे सामईन में था
मुझे सुनाते रहे लोग वाकिया मेरा

खत मैनें भेजी जो मेरे पते से तेरे पते पर
खत वापस कर दिया मुझको डाकिया मेरा

इतनी शोहरत की तलब भी ना थी कभी
मैं भीड़ से ही देखता रह गया झाँकिया मेरा

खील उठी मैखाने की सजावट मेरे आने से
रात भर पिलाता रहा शराब साकिया मेरा